Mobile ka lalach se kaise bache

 


हेलो दोस्तों कैसे हो आप सब आज मैं आप लोगों को एक ऐसा मुद्दा पे बात करने वाला हूं। जो कि इस बात को लोग समझ ही नहीं पा रहे हैं क्या आपने सोचा है कि मोबाइल कंपनी जितनी भी सारी है।  हर एक कंपनी 2 महीना में एक नया फोन बाजार में लेकर आती है। और अजीब बाते ये है जैसे ही बाजार में नया फोन आता है वैसे ही बिकने लग जाता है। क्या कभी आपने यह सोचा है कि बाजार में इतने सारे और इतने तरह के फ़ोन  होते हुए भी कंपनी नया फोन कैसे बेच रही है।  आज देखा जाए तो हर एक घर में चार से पांच फ़ोन रहते है।


 तो दोस्तों चलिए अब हम जानते हैं कि कंपनी हमें कैसे अपने  फ़ोन को खरीदवाते है जबकि हमें कोइ ऐसा खास जरुरत नहीं है फिर भी  आज हम 5-6 महीने में एक नया फ़ोन  को बदल लेते है या फिर लेने को मन करता है ऐसा होता है कि नहीं दोस्तों। आपके साथ 



कुछ महीने बाद नया फ़ोन लेने का मन क्यों करता है?

पिछले कुछ साल में हमने ये देखा था कि कोइ भी मोबाइल कंपनी अपना कोइ भी मोबाइल 6-8 महीने में लॉन्च करती थी लेकिन अब कहानी बिलकुल बदल गयी है। अब कंपनी 2-3 महीने में उसी फ़ोन को rebrand करके अपने sub- brand के नाम से फ़ोन को  निकल देते है जैसे realme का है narzo, redmi का है poco अब लोगो को दिक्कत ये होती है।


 कि जैसे कोइ 20 हज़ार का फ़ोन ख़रीदा अब उसके 1 महीने बाद ही उससे  अच्छा फीचर्स वाले फ़ोन वो भी उससे काम दामों में देखने को मिल गया अब लोगो के बहुत बुरा लगता है


कि में यदि 1 महीने बाद मोबाइल खरीदता तो अच्छा रहता था। दूसरी दिक्कत ये आती है कि  कंपनी ज्यादा मोबाइल निकलती है तो कि यूजर को ये लगने लगता है कि मेरे फ़ोन पुराना होता गया है या फिर dowan grade हो गया है।  फिर उसे नया मोबाइल खरीदने का मन करता है ऐसे ही हमारी साइकोलॉजि काम करती है।



स्पिफिकेशन दिखाकर फ़ोन को बेचना?


आज का समय का सबसे बड़ा चीज ये बन गयी है कि लोगो को स्पिफिकेशन दिखा दिखा कर ज्यादा से ज्यादा फ़ोन को बेचना एक अच्छा प्रोसेसर देना अच्छा कैमरा देना और बैटरी देना ही फोन को अच्छा नहीं बनाता अगर कोई ऑनलाइन 10 व्यक्ति मोबाइल खरीद रहा है।


तो उसमें से आठ व्यक्ति सिर्फ ऑन पेपर स्पिफिकेशन से फ़ोन को judge करते है अब आप लोग बोलोगे कि फ़ोन को कैसे फिर कैसे compare करें उसका, सॉफ्टवेयर कैसा है उसका UI कैसा है



फ़ोन किना पकड़ने में अच्छा है या फिर भारी है ये सब भी मैटर करता है। हाल ही में PocoX3 कितना अच्छा फ़ोन है मगर उस फ़ोन का वेट इतना था कि लोग फ़ोन को घुमाने लगे थे। रियल लाइफ में  प्रोसेसर मैटर नहीं करता है


सिर्फ  प्रोसेसर देखकर के फोन को लेना यह पूरी तरह से सही नहीं है। कि मेरा प्रोसेसर इतना पावरफुल है उतना पावरफुल है रियल लाइफ में प्रोसेसर का कोई अंतर देखने को नहीं मिलेगा  अगर आप एक हैवी यूजर  और  प्रो गमर नहीं है।


एक मोबाइल में हार्डवेयर के साथ सॉफ्टवेयर  का भी ऑप्टिमाइज होना बहुत ज्यादा जरूरी होता है अगर कंपनी ने प्रोसेसर बहुत तगड़ा सा दे दिया है और सॉफ्टवेयर उतना ऑप्टीमाइज़्ड नहीं होगा तो है

फिर वह प्रोसेसर  जैसा काम करना चाइये था वैसा काम  नहीं कर पाएगा आपका मोबाइल में और आपको एक अच्छा एक्सपीरियंस नहीं मिल पायेगा। तो दोस्तों अगर मेरा आर्टिकल अच्छा लगा तो कमेंट करना मत भूलिये गा।



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